सद्गुरु: आनंद जाकर उस वेश्या के घर रुके। मानसून का मौसम होने के कारण ठंड बढ़ गई थी, इसलिए उसने आनंद को ओढ़ने के लिए एक अच्छी रेशमी चादर दी। आनंद ने उसे ओढ़ लिया। उसने आनंद के लिए स्वादिष्ट भोजन बनाया और उन्हें परोसा, आनंद ने भोजन किया। शाम के समय, उसने आनंद के सामने नृत्य किया। आनंद वहीं बैठे रहे, और बिल्कुल एकाग्रता से उसका नृत्य देखा। नगरवासी कहने लगे, ‘बस, अब तो इसका काम तमाम हो गया।’ जब मानसून का मौसम समाप्त हुआ और भिक्षुओं के आगे जाने का समय आया, तो आनंद गौतम के पास वापस लौटे और उनके साथ एक भिक्षुणी भी थी। मानव बुद्धि का स्वभाव ही है कि वह हमेशा सर्वोच्च की खोज करती है। हो सकता है कि लोग किसी चीज में उलझे हों- जैसे कि शराब, नशीले पदार्थ, या उनके सामाजिक नाटक, लेकिन उनकी अभिलाषा सदैव सर्वोच्च को पाने की होती है। हमें बस उन्हें यह समझाने की जरूरत है कि जहां वे अभी हैं उससे भी कहीं बेहतर 'ऊंचाइयां' मौजूद हैं। English Title: Story Contd English Video: https://www.instagram.com/reel/DLUpguWTY9t/
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!
1:01Sadhguru Hindi
पिछला सप्ताह