चित्त की शुद्धि के बिना ज्ञान का प्रकाश संभव नहीं 💠 विशुद्ध चित्त में ही ज्ञान का प्रकाश होता है। चित्त को शुद्ध करने के लिए मन और इन्द्रियों को भगवान में लगाए रखना आवश्यक है। जब मन और इन्द्रियों से पापकर्म होते हैं, तब चित्त मलिन हो जाता है। 💠हम जो भी कर्म करते हैं, उसके दो प्रकार के फल होते हैं— - दृष्ट फल – जो सुख या दुःख के रूप में हमें दिखाई देता है। - अदृष्ट फल – जो दिखाई नहीं देता, परंतु हमारे चित्त पर संस्कारों के रूप में अमिट छाप छोड़ जाता है। 💠 प्रत्येक कर्म हमारे चित्त पर एक संस्कार अंकित करता है। यदि अनुचित कर्मों से चित्त मलिन हो गया है, तो वेद और शास्त्रों द्वारा बताए गए शुभ कर्मों के माध्यम से उसे पुनः शुद्ध किया जा सकता है। 💠 जैसे जल से कीचड़ भी बनता है और उसी जल से गंदगी भी धुल जाती है, उसी प्रकार कर्मों से मन मलिन भी होता है और कर्मों से ही मन शुद्ध भी हो सकता है। 💠 निषिद्ध और पापकर्म मन को अशुद्ध करते हैं, जबकि पुण्यकर्म उसे निर्मल बनाते हैं। इसलिए— - हमारी आँखें भगवान के दर्शन करें। - हमारे कान भगवान की कथा और गुरु के उपदेश का श्रवण करें। - हमारे हाथ भगवान की पूजा और सेवा में लगें। - हमारे चरण तीर्थयात्रा की ओर बढ़ें। - हमारी वाणी भगवान के नाम, गुण और लीलाओं का संकीर्तन करे। 💠राजा रहूगण को उपदेश देते हुए महापुरुषों ने कहा कि जब तक महात्माओं के चरणों की रज का अभिषेक हमारे मस्तक पर नहीं होता, तब तक चित्त की वास्तविक शुद्धि नहीं होती। और जब तक चित्त शुद्ध नहीं होता, तब तक उसमें ज्ञान का प्रकाश नहीं होता। ज्ञान के बिना जीव को मुक्ति भी प्राप्त नहीं होती। 💠 इसीलिए संतों का महत्त्व अनंत है। सत्संग का प्रभाव जीवन को बदल देता है। अधिक से अधिक सत्संग करें और संतों की सेवा करें। इसी भाव को व्यक्त करते हुए गोस्वामी तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा तथा रामचरितमानस के आरंभ में लिखा है— "श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।" अर्थात् गुरुचरणों की रज से अपने मनरूपी दर्पण को शुद्ध करके ही भगवान के निर्मल यश का वर्णन करना चाहिए। 💠 मनुष्य जैसा सुनता है और जैसा देखता है, वैसा ही उसका मन और उसके विचार बन जाते हैं। इसलिए वेदों में प्रार्थना की गई है— "भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः, भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।" हे देवताओं! हमें अपने कानों से कल्याणकारी वचन सुनने का सौभाग्य मिले और अपनी आँखों से कल्याणकारी दृश्य देखने का अवसर प्राप्त हो। 💠 अतः हमें वही देखना, सुनना और करना चाहिए जो हमारे चित्त को शुद्ध करे, हमारे संस्कारों को पवित्र बनाए और हमें ज्ञान, भक्ति तथा अंततः मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर करे। Subscribe to @ppbhaishri to stay connected to divinity. 🔔 Follow Pujya Bhaishri on Twitter, Instagram, Facebook for regular Seva, Satsang and Sankirtan snippets. 📲 IG - https://bit.ly/PBRO-IG 👉🏼 X - https://bit.ly/PBRO-X 👋🏾 FB - https://bit.ly/PBRO-FB 🔴 For the latest Bhajan, Kirtan, Katha-Event, SVN- News, SVN-Kids episodes, click on the bell icon to subscribe to notifications on OFFICIAL YouTube channels 🔔Sandipani.TV for LIVE events ▶️ https://www.youtube.com//sandipanitv 🔔Bhaishri Rameshbhai Oza for Kathā Clips and Sandesh ▶️ https://www.youtube.com//bhaishrirameshbhaioza 🔔Bhaishri Bhajans Sankirtan ▶️ https://www.youtube.com//bhaishribhajansankirtan To stay connected: www.sandipani.org/
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