ऑकलैंड (न्यूज़ीलैंड) में स्थित श्रीराम मंदिर में पूज्य भाईश्री पधारे। पूज्य भाईश्री ने मंदिर में विराजित देवी-देवताओं के दर्शन एवं पूजन-अर्चन किया तथा उपस्थित भक्तों को अपने आशीर्वचन प्रदान किए। 00:00 Shri Ram Mandir, Auckland 00:23 Pujya Bhaishri ka Mandir me Aagman 01:44 Pujya Bhaishri ke dwara Pravachan 48:01 Pujya Bhaishri ka Managal Prasthan ☀️ हृदय में राम हों तो जीवन का विष भी विश्राम बन जाता है 🔹 सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता उसकी समृद्ध ज्ञान परंपरा है। आज विदेशों में भी संस्कृत के विद्वान ब्राह्मण, वेद-पाठ और धार्मिक संस्कारों का सुंदर वातावरण देखने को मिलता है, जो हमारी गुरुकुल और संस्कृत पाठशालाओं की देन है। 🔹 केवल संन्यासी ही नहीं, बल्कि गृहस्थ ऋषियों ने भी भारतीय संस्कृति और धर्म को आगे बढ़ाने में महान योगदान दिया है। आज जो धर्म और संस्कार जीवित हैं, उनमें ऋषि परंपरा का बड़ा योगदान है। 🔹 सत्संग कोई अवसर विशेष का कार्य नहीं, बल्कि जीवन की दैनिक आवश्यकता है। जैसे शरीर को प्रतिदिन भोजन चाहिए, वैसे ही मन को प्रतिदिन सत्संग और भगवान के स्मरण की आवश्यकता होती है। 🔹 बिना हरिकथा, स्वाध्याय और सत्संग के बीता हुआ दिन वास्तव में अधूरा दिन है। घर पर रामायण, श्रीमद्भागवत या भगवद्गीता का नियमित पाठ भी सत्संग का ही एक रूप है। 🔹 मनुष्य संसार में सुख की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करता है, लेकिन जीवन के मंथन से केवल अमृत ही नहीं, विष भी निकलता है। कोई भी व्यक्ति दुःख नहीं चाहता, फिर भी जीवन में कठिनाइयाँ, चिंताएँ और संघर्ष आते ही हैं। 🔹 जब अमृत की आशा में देवताओं और दैत्यों ने मंथन किया, तब सबसे पहले कालकूट विष निकला। यह हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता और सुख की खोज के साथ चुनौतियाँ भी आती हैं। 🔹 जब कालकूट विष निकला, तब भगवान शिव ने समस्त जगत की रक्षा के लिए उसका पान किया। माता पार्वती ने जब पूछा कि आपको कुछ हुआ तो नहीं, शिवजी ने कहा की मुझे "विश्राम" मिला। 🔹 "विष" और "राम" का अद्भुत आध्यात्मिक अर्थ :- जब हृदय में राम का निवास हो, तब जीवन का सबसे बड़ा विष भी "विश्राम" बन जाता है। 🔹 तन की थकान नींद से दूर हो जाती है, लेकिन मन की थकान केवल भगवान के स्मरण, भक्ति और सत्संग से ही समाप्त होती है। चिंता, क्रोध, लोभ और मानसिक अशांति से मुक्त होने का मार्ग अध्यात्म ही है। 🔹 सनातन धर्म में अनेक देवी-देवताओं की उपासना का उद्देश्य भिन्नता नहीं, बल्कि एक ही परम तत्व की विविध अभिव्यक्तियों को स्वीकार करना है। राम, कृष्ण, शिव, शक्ति, गणपति या हनुमान—सभी उसी एक परम सत्य के विभिन्न स्वरूप हैं। 🔹 व्यक्ति अपनी रुचि, प्रकृति और भाव के अनुसार किसी भी आराध्य स्वरूप की उपासना कर सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि भक्ति अनन्य और निष्कपट हो। 🔹जीवन में धन, सुविधा और भौतिक संसाधन तो पैसे से प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन मन की शांति, आनंद और वास्तविक सुख केवल धर्म, उपासना और सत्संग से ही प्राप्त होता है। "जीवन में सुख की तलाश करते हुए विष रूपी कठिनाइयाँ अवश्य आएँगी, लेकिन यदि हृदय में राम का निवास है, तो वही विष भी विश्राम का कारण बन जाएगा। इसलिए नित्य सत्संग, स्वाध्याय और भगवान के स्मरण को जीवन का भाग बनाना चाहिए।" #PujyaBhaishri #RamBhakti #Mahadev #ShivTatva #SanatanDharma #RamKatha #Satsang #Spirituality #Bhakti #HarHarMahadev #HinduWisdom #LifeLessons Subscribe to @PPBhaishri to stay connected to divinity. 🔔 Follow Pujya Bhaishri on Twitter, Instagram, Facebook for regular Seva, Satsang and Sankirtan snippets. 📲 IG - https://bit.ly/PBRO-IG 👉🏼 X - https://bit.ly/PBRO-X 👋🏾 FB - https://bit.ly/PBRO-FB 🔴 For the latest Bhajan, Kirtan, Katha-Event, SVN- News, SVN-Kids episodes, click on the bell icon to subscribe to notifications on OFFICIAL YouTube channels 🔔Sandipani.TV for LIVE events ▶️ https://www.youtube.com//sandipanitv 🔔Bhaishri Rameshbhai Oza for Kathā Clips and Sandesh ▶️ https://www.youtube.com//bhaishrirameshbhaioza 🔔Bhaishri Bhajans Sankirtan ▶️ https://www.youtube.com//bhaishribhajansankirtan To stay connected: https://www.sandipani.org/
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