श्री हरीवंश || श्री भक्तमाल कथा || श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज #sripundrik #bhaktmalkatha #bhagwatkatha #mumbai #spirituality #sanatandharma #bhaktikatha #bhakti #radhavallabhshriharivansh #shriharivansh #radhavallabh #ganeshchaturthi 00:00-11:11 व्यास पीठ पूजन 11:12-17:42 मंगलाचरण 17:43-40:08 जय राधा माधव (कीर्तन) 40:09-41:32 कथा में मंगलाचरण क्यों होता है? 41:33-43:38 नाभा गोस्वामी जी के सामने प्रत्येक महापुरुष प्रकट हुए 43:39-45:48 कथा का श्री गणेश आज हुआ है 45:49-46:10 वृंदावन में गणेश जी विराजमान हैं 46:11-48:28 स्कंद पुराण में गणेश चतुर्थी के उत्सव का वर्णन 48:29-49:54 गणेश जी का नाम सिद्धिविनायक कैसे पड़ा? 49:55-51:32 पार्वती जी ने उबटन से शिशु को प्रकट किया 51:33-52:50 पार्वती जी ने उस शिशु को क्या आदेश दिया? 52:51-54:51 गणेश जी का मत्सक गज जैसा क्यों है? (कथा) 54:52-1:02:48 महादेव ने विनायक का मस्तकोच्छेदन क्यों किया? (तात्विक दृष्टिकोण) 1:02:49-1:08:14 गाइए गणपति जग वंदन 1:08:15-1:08:38 इस गणेश चतुर्थी पर क्या करें? 1:08:39-1:11:18 मोदक का तात्विक अर्थ 1:11:19-1:13:24 राधावल्लभ श्री हरिवंश (कीर्तन) 1:13:25-1:15:47 वृंदावन में पहले मंदिर नहीं, कुंज थे 1:15:48-1:17:18 राधा चरण प्रधान हृदय अति उपासी(भक्तमाल छप्पय) 1:17:19-1:20:12 भक्त का चरित्र सुनने से भगवान का स्वभाव समझ आता है 1:20:13-1:24:00 आपका गुरुदेव के चरणों में समर्पित होने का कारण क्या है? 1:24:01-1:24:38 हरिवंश महाप्रभु अपने माता पिता संग कहां विराजते थे ? 1:24:39-1:25:43 भाईचारे की बातें कब अच्छी लगती हैं? 1:25:44-1:28:17 भक्तमाल के ग्रन्थ से आपकी सनातन में श्रद्धा बढ़ेगी 1:28:18-1:34:09 एक भक्त संतति पूरा कुल तार देती है 1:34:10-1:37:09 ठाकुरजी खम्बे से क्यों प्रकट हुए? 1:37:10-1:38:53 नरसिंह स्तुति 1:38:54-1:40:45 प्रह्लाद को देख नरसिंह क्यों रो पड़े? 1:40:46-1:41:33 प्रह्लाद ने अपने पिता को क्या सौभाग्य दिया? 1:41:34-1:45:56 नरसिंह स्तुति 1:45:57-1:47:01 हरिवंश महाप्रभु के माता पिता रोज़ ठाकुरजी से क्या प्रार्थना करते? 1:47:02-1:49:03 श्री हरिवंश महाप्रभु का नाम हरिवंश कैसे पड़ा? 1:49:04-1:50:03 महाप्रभु ने सबसे पहले क्या बोला? 1:50:04-1:51:06 किशोरी जू का नाम अत्यंत मीठा है 1:51:07-1:52:53 संसार में कितने अमृत हैं? 1:52:54-1:55:39 वृंदावन में सांप्रदायिक मतभेद मत लाइये 1:55:40-1:56:32 कुंज में 3 प्रकार की सखी कौनसी हैं? 1:56:33-2:01:42 राधा हमारी गोरी गोरी (भजन) 2:01:43-2:04:07 तीनों प्रकार की सखियों का वर्णन 2:04:08-2:05:06 हास्य प्रसंग 2:05:07-2:07:19 भक्तों के बचपन के खेल भी भक्तिमय हैं 2:07:20-2:09:01 "ह" आनंद का अक्षर है 2:09:02-2:10:23 हरिवंश महाप्रभु अपनी सखा मंडली को सजाते 2:10:24-2:14:23 हरिवंश महाप्रभु ने किया श्रृंगार (लीला) 2:14:24-2:16:27 कथा में मिला करेला प्रसाद 2:16:28-2:17:57 हमारे आचार्य तटस्था शक्ति के रूप हैं 2:17:58-2:19:51 प्रसाद किस दृष्टि से पाओ? 2:19:52-2:21:53 शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी खुले चंद्रमा के नीचे विराजते हैं 2:21:54-2:25:04 शरद पूर्णिमा पर हरिवंश जी से ठाकुर जी क्या बोले? 2:25:05-2:30:12 आजु गोपाल रास रस खेलत(पद) 2:30:13-2:33:42 झूलन उत्सव में ठाकुरजी की हरिवंश जी संग लीला 2:33:43-2:34:55 हरिवंश जी ने मांगे अपने ठाकुर जी 2:34:56-2:36:28 कैसे मिले हरिवंश जी को अपने श्री नवरंगी लाल? 2:36:29-2:39:45 लाड़ लड़ाओ जुगल को लाड़ लड़ाओ (भजन) 2:39:46-2:42:51 हरिवंश महाप्रभु का विवाह हुआ 2:42:52-2:43:49 कई समय तक राधारमणजी के गोसाईं जनों के नाम कैसे रखे जाते थे? 2:43:50-2:45:32 ठाकुरजी को अपने परिवार का सदस्य मान लो 2:45:33-2:48:18 हास्य प्रसंग 2:48:19-2:54:16 अपने घर के ठाकुरजी की सेवा प्रत्येक सदस्य में बाँट दीजिए 2:54:17-2:56:13 मरणासन्न स्थिति पर हरिवंश जी की मैया ने उन्हें क्या बोला? 2:56:14-3:01:18 भाग बड़ो वृंदावन पायो(पद) 3:01:19-3:04:25 किशोरी जू ने हरिवंश जी को वृंदावन आने को कहा 3:04:26-3:07:15 ठाकुर जी पावर हाउस हैं 3:07:16-3:09:26 प्रिया जू ने हरिवंश जी को क्या नया इशारा दिया? 3:09:27-3:11:21आत्मदेव जी को प्रिया जी ने क्या संकेत दिया? 3:11:22-3:12:50 रजिस्ट्रेशन पर क्या बोले महाराज जी ? 3:12:51-3:14:05 हरिवंश जी का दूसरा विवाह हुआ 3:14:06-3:15:32 सांप्रदायिक अपवाद भक्ति को नष्ट करता है 3:15:33-3:18:03 हरिवंश जी के दूसरे विवाह के पीछे क्या लीला थी? 3:18:04-3:22:23 वृंदावन मेरो वृन्दावन (पद) 3:22:24-3:24:19 थोड़े थोड़े समय में ब्रज का वास करते रहो 3:24:20-3:25:09 ब्रज आश्रय गुरु आश्रय में लो 3:25:10-3:26:11 हरिवंश जी हर सेवा खुद के हाथ से करते 3:26:12-3:29:26 हरिवंश जी ने अपने एक शिष्य को क्यों त्याग दिया ? 3:29:27-3:30:37 राधारमण जी की बीरी भोग की अनुभति 3:30:38-3:32:45 जब हरिवंश जी ने कराए अपने शिष्य को साक्षात प्रियालाल के दर्शन 3:32:46-3:33:58 हमें भक्त की कथा से क्या समझना है? 3:33:59-3:39:10 हित चौरासी जी प्रेम की नींव हरिवंश जी ने कैसे रखी? 3:39:11-3:42:05 बिना तिलक लगाए भी आप कब हरिवंशी होंगे? 3:42:06-3:46:54 जोई जोई प्यारो करे (पद) 3:46:55-3:48:12 हास्य प्रसंग 3:48:13-3:49:47 व्यास पीठ पर किसी का स्मरण भी आशीर्वाद है 3:49:48-3:50:50 हरिवंश जी ने गाई प्रसाद की महिमा 3:50:51-3:52:03 हरिवंश जी लीला पूर्ण कर अपने वास्तविक सखी रूप में प्रकट हुए 3:52:04-3:53:07 विरक्त या गृहस्थ ,हर परिवेश में भक्ति की जा सकती है 3:53:08-3:55:19 कथा विश्राम का क्रम 3:55:20-3:59:31 श्री राधे राधे गोविंद (कीर्तन) 3:59:32-4:04:40 आरती
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