नाम देव जी की कथा ॥ श्री भक्तमाल कथा ॥ श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी On Day 5 of the Shri Bhaktmal Katha in Mumbai, Maharaj Ji beautifully narrates the divine life and devotion of Shri Namdev Ji — a devotee whose heart was completely surrendered to Shri Vitthal Bhagwan. Shri Namdev Ji’s devotion was not just a ritual it was a deeply personal relationship with Vitthal. His love, trust and surrender was so pure that he was considered as Bhagwan Ansh. Through the inspiring story of Shri Namdev Ji, today’s Katha explores the true meaning of Bhakti, Prem, Shraddha and complete surrender at the feet of Bhagwan. 🙏 Watch the complete Shri Bhaktmal Katha Day 5 LIVE from Mumbai and immerse yourself in the divine stories of the great saints and devotees of Sanatan Dharma. #sripundrik #bhaktmaalkatha #bhaktmaal #namdevji #bhakti #sanatandharma #bhaktikatha #mumbai #vitthalbhakti #vitthal #pandarpur श्री भक्त माल कथा , मुंबई 2026 Day 5 00:00–10:09 व्यास पीठ पूजन 10:10–14:49 मंगलाचरण 14:50–33:02 जय राधा माधव (कीर्तन) 33:03–36:20 भक्त को परमात्मा प्रणाम में मिलता है 36:21–39:11 कथा की सफ़लता क्या है? 39:12–39:48 भक्तमाल भक्ति को सुदृढ़ करती है 39:49–44:27 कथा में अतृप्ति तो होती है पर तलाश ख़त्म हो जाती है 44:28–46:17 थारी सांवरी सूरत (पद) 46:18–48:18 नाभा दास जी द्वारा लिखित नामदेव जी का छप्पय 48:19–52:04 नामदेव जी ने क्या प्रतिज्ञा की? 52:05–52:54 जाना बाई ने अपने पद में क्या लिखा है? 52:55–56:30 कण कण में भगवदर्शन करना चाहिए 56:31–1:00:03 एकमात्र ऐसी लीला जहां भक्त का नाम भगवान ने स्वीकार किया है 1:00:04–1:35:06 नामदेव जी के जन्म की कथा 1:35:07–1:36:15 नामदेव जी का रूप एकदम ठाकुर जी जैसा था 1:36:16–1:39:03 नामदेव जी का नाम कैसे रखा गया? 1:39:04–1:39:58 प्रियादास जी द्वारा लिखित छप्पय 1:39:59–1:40:41 भगवान के साथ सच्चा संबंध हो तो ठाकुर जी उसका निर्वाह करते हैं 1:40:42–1:42:50 ठाकुर जी ने एक माता का अंतिम संस्कार किया 1:42:51–1:44:42 उमापति जी रामजी को अपना शिष्य मानते थे 1:44:43–1:44:52 पूजा और सेवा में अतंर होता है 1:44:53–1:46:27 भक्ति में संबंध की प्रधानता है 1:46:28–1:48:12 ममत्व में ये सामर्थ्य है कि परमात्मा का भी शासन हो सकता है 1:48:13–1:50:29 गोपी गीत श्लोक व्याख्या 1:50:30–1:51:53 सम्बन्धानुबद्धत्ता दो तरफा होती है 1:51:54–1:54:19 नामदेव जी में स्वाभाविक भक्ति है 1:54:20–1:55:14 नामदेव जी के मन में सदा एक धुन चलती रहती थी 1:55:15–1:59:57 विठ्ठल मांझा 1:59:58–2:00:56 नामदेव जी विठ्ठल प्रभु की सेवा करने का अभिनय करते थे 2:00:57–2:12:46 विठ्ठल प्रभु ने नामदेव जी का भोग कैसे पाया? 2:12:47–2:13:54 विठ्ठल मांझा 2:13:55–2:14:54 तीन दिन बाद नाना जी वापस आए 2:14:55–2:18:26 क्या भोग बनाते समय हम भगवान को गिनते हैं? 2:18:27–2:20:00 नामदेव जी ने विठ्ठल प्रभु को धमकाया 2:20:01–2:24:49 महाराज जी की जब भिंड में कथा हुई(हास्य प्रसंग) 2:24:50–2:26:41 कई बार भाव के लिए विधि को भी गौण करना ठीक होता है 2:26:42–2:28:05 नामदेव जी कैसे कैसे सेवा करते? 2:28:06–2:29:00 कथा का सबसे बड़ा प्रसाद क्या है? 2:29:01–2:32:17 हमेशा खुद को सत्य साबित करने की ज़रूरत नहीं होती है 2:32:18–2:34:48 नामदेव जी ने गैया को जीवित किया 2:34:49–2:36:22 नामदेव जी विठ्ठल प्रभु का दर्शन करने गए 2:36:23–2:37:33 जय जय राम कृष्ण हरि (कीर्तन) 2:37:34–2:40:16 नामदेव जी को मंदिर से बाहर निकाला 2:40:17–2:41:01 हास्य प्रसंग 2:41:02–2:41:40 जय जय राम कृष्ण हरि(कीर्तन) 2:41:41–2:43:48 पंढरीनाथ जी पीछे की तरफ़ क्यों घूमे? 2:43:49–2:45:20 नामदेव जी के घर में आग लगी 2:45:21–2:47:05 भगवद् नाम की महिमा लीला 2:47:06–2:47:48 नामदेव जी ने कुत्ते में विठ्ठल प्रभु के दर्शन किए 2:47:49–2:48:20 नामदेव जी पंढरीनाथ की देहली पर विराजमान हैं 2:48:21–2:55:04 सभी को प्रणाम व अग्रिम कार्यक्रम सूचना 2:55:05–2:58:36 शायरी 2:58:37–3:01:18 ब्रज भूमि मोहिनी मैं जानी(पद) 3:01:19–3:06:12 राधे राधे गोविंद(कीर्तन) 3:06:13–3:09:30 मंगल गीत (आरती)
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