युवावस्था और अध्यात्म का संगम वास्तव में अद्भुत और अनुपम है! - पूज्य भाईश्री https://youtu.be/wYmcftAJwKw क्या भक्ति बुढ़ापे के लिए है? श्रीमद्भागवत का वेणु गीत केवल कथा नहीं, बल्कि तन्मयता का शास्त्र है। 21वें अध्याय में श्रीकृष्ण की वेणु-नाद गोपियों को ब्रज की ओर मोड़ देती है—जहाँ केवल राधे-राधे का रस बहता है। दशम स्कंध के रास पंचाध्यायी और गोपी गीत यह उद्घोष करते हैं कि युवावस्था ही अध्यात्म का स्वर्णकाल है। आद्य शंकराचार्य (32 वर्ष) और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने युवावस्था में ही आत्मसाक्षात्कार कर लिया। 👉 भक्ति की शुरुआत बचपन से हो 👉 युवावस्था साधना के लिए है 👉 वृद्धावस्था अनुभूति और आनंद के लिए है।
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