स्वामी श्री हरिदास || श्री भक्तमाल कथा || श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज 00:00–05:01 व्यास पीठ पूजन 05:02–12:41 संचालक द्वारा संबोधन 12:42–21:22 मंगलाचरण 21:23–43:05 जय राधा माधव (कीर्तन) 43:06–44:40 इस कथा के यजमान स्वयं ठाकुर जी हैं 44:41–50:04 पिताजी महाराज जब इस मंच पर प्रवचन करते तो मंच को घुमाते क्यों थे? 50:05–51:04 जब भक्त की कथा होती है तो पूरा मंदिर आता है 51:05–53:17 भक्तमाल किसे कहते हैं? 53:18–57:12 भक्तमाल से आक्रांताओं के बीच साधु-संतों का परिश्रम पता चलता है 57:13–58:48 महाराज जी विगत दिवस कथा करके रात को कहां गए थे? 58:49–59:27 भक्तमाल में नाभादास जी द्वारा गोपाल भट्ट जी पर लिखी पंक्ति 59:28–1:00:17 प्रियादास जी महाराज कौन हैं? 1:00:18–1:03:48 मंदिर में भंडारी कौन होता है और वह क्या करता है? 1:03:49–1:05:43 प्रियादास जी ने गोपाल भट्ट जी के बारे में छप्पय लिखा 1:05:44–1:09:10 संत व भगवान अपने परिकर के संग आते हैं 1:09:11–1:14:06 कभी न कभी हम सबने भगवान के दर्शन किए हैं 1:14:07–1:15:55 श्री हरिदास जी ललिता सखी हैं 1:15:56–1:18:04 नाभादास जी द्वारा हरिदास जी के लिए लिखित छप्पय 1:18:05–1:20:37 श्यामा प्यारी कुंज बिहारी (कीर्तन) 1:20:38–1:22:19 हरिदास जी को सब रसिक कहते थे 1:22:20–1:27:03 वृन्दावन के 3 परकोटे हैं 1:27:04–1:28:37 जब महाराज जी मुंबई से पुणे गए 1:28:38–1:30:14 श्री हरिदास जी का प्राकट्य और जीवन अवधि 1:30:15–1:33:42 भक्त प्रहलाद की भक्ति कैसी है? 1:33:43–1:35:10 जामवंत जी ने कुंभकर्ण को देखकर क्या कहा? 1:35:11–1:36:27 ब्रजवासी से सभी क्या उम्मीद रखते हैं? 1:36:28–1:39:41 गोपियों की भक्ति स्वाभाविक है 1:39:42–1:42:13 पाग टेढ़ी सी धरे (पद) 1:42:14–1:43:29 भक्ति के लिए माता-पिता को कैसे मनाएं? 1:43:30–1:44:53 बच्चों का नाम भगवान के नाम पर रखने से क्या होता है? 1:44:54–1:47:04 iPhone पर महाराज जी ने क्या बोला? 1:47:05–1:50:31 भगवान के नाम में प्रेम का रंग घुला हुआ है 1:50:32–1:52:16 हरिदास जी को महारास लीला के दर्शन हुए 1:52:17–1:59:17 रास रच्यो है (पद) 1:59:18–2:00:00 महाराज जी और बाबा गुरुदेव का चित्रपट भेंट में मिला (हास्य प्रसंग) 2:00:01–2:01:22 किसी के भगवद् दर्शन पर संशय करना उचित नहीं 2:01:23–2:02:22 हरिदास जी यमुना किनारे मिले 2:02:23–2:03:29 यमुना जी का वेदांतिक भाव 2:03:30–2:04:17 जिन नेत्रों ने भगवान को देखा है, उनमें भगवान दिखे हैं 2:04:18–2:06:07 बिहारी जी की परंपरा श्री जगन्नाथ जी से है 2:06:08–2:07:45 माई री सहज जोरी प्रगट भई (पद) 2:07:46–2:08:59 हरिदास जी ने सभी को साक्षात् ठाकुर जी के दर्शन करवाए 2:09:00–2:11:13 संत हरिदास जी ने अपने असल स्वरूप का दर्शन करवाया 2:11:14–2:13:16 भारत की जननी में परमात्मा को जन्म देने की ताकत है 2:13:17–2:16:15 संत हरिदास जी को निधिवन में निधि प्राप्त हुई 2:16:16–2:17:07 निधि का अर्थ 2:17:08–2:18:20 कई महापुरुष स्थान के नाम से बुलाए जाते हैं 2:18:21–2:21:42 स्वस्थ होने का असली अर्थ क्या है? 2:21:43–2:24:06 हरिदास जी के प्रसिद्ध चित्र वास्तविक हैं, काल्पनिक नहीं 2:24:07–2:26:10 बिहारी जी के चरणों से नित्य बारह मणियां उत्पन्न होती थीं 2:26:11–2:29:17 स्वयं ठाकुर जी स्वामी जी का उच्छिष्ट पाते थे 2:29:18–2:32:20 निधिवन में बांके बिहारी लाल का प्राकट्य हुआ 2:32:21–2:37:25 ब्रज में हो रही जय-जयकार (बधाई गान) 2:37:26–2:39:40 वृंदावन में बाग बुंदेला नाम का स्थान 2:39:41–2:40:31 स्वामी जी के द्वार पर कौन-कौन आया? 2:40:32–2:41:58 महाराज जी की नजरें एक श्रोता पर टिकीं 2:41:59–2:44:41 कोई ईर्ष्या करे तो दुखी नहीं, खुश होना चाहिए 2:44:42–2:45:28 तानसेन अकबर के दरबार में कैसे आया? 2:45:29–2:46:37 किसी को बर्बाद करना हो तो क्या करें? 2:46:38–2:48:16 राग दीपक के लिए राग मल्हार आना आवश्यक है 2:48:17–2:49:24 ब्रह्मांड को सबसे पहले स्वर किसने दिया? 2:49:25–2:54:47 तानसेन ने राग दीपक गाया 2:54:48–2:57:01 आये माई वरषा के अगवानी (मल्हार राग पद) 2:57:02–3:01:44 तानसेन को मल्हार राग कैसे मिला? 3:01:45–3:03:21 अकबर के काल में वृन्दावन के कई स्थानों का प्रकाश हुआ 3:03:22–3:05:24 तानसेन अकबर के नवरत्नों में शामिल हुआ 3:05:25–3:07:03 अकबर ने स्वामी जी को सुनने की इच्छा प्रकट की 3:07:04–3:07:50 महाराज जी कथा के शौकीन हैं 3:07:51–3:09:29 तानसेन और अकबर स्वामी जी के पास आए 3:09:30–3:12:39 बरसत नव घन जालम (पद प्रसंग सहित) 3:12:40–3:14:10 संगीत का श्रोता कौन है? 3:14:11–3:15:38 सुर को खराब करने से गौहत्या का पाप लगता है 3:15:39–3:20:04 अकबर ने स्वामी जी से सेवा मांगी 3:20:05–3:21:18 वृंदावन में संतों ने समाधि क्यों ली? 3:21:19–3:24:24 लाहौर से व्यापारी बिहारी जी के लिए इत्र लेकर आया 3:24:25–3:25:22 आज ब्रज में होली रे रसिया 3:25:23–3:29:06 पूरे निधिवन से उसी इत्र की सुगंध आने लगी 3:29:07–3:32:44 एक पंडित जी स्वामी जी के पास पारस मणि ले कर आए 3:32:45–3:33:23 पर्वत पूरी जी स्वामी जी को जादू दिखाने आए 3:33:24–3:34:13 वृंदावन के कई संत मोर, गैया आदि बनकर परिक्रमा देते थे 3:34:14–3:35:09 पर्वत पूरी जी मोर बनकर आए 3:35:10–3:35:30 स्वामी जी ने नित्य धाम में प्रवेश किया 3:35:31–3:37:38 आप अन्नमय कोष में हैं या आनंदमय कोष में? 3:37:39–3:42:02 राधे राधे गोविंद (कीर्तन) 3:42:03–3:44:28 कथा की व्यवस्था संबंधी जानकारी एवं अभिवादन 3:44:29–3:47:35 आरती
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