गोकुल–वृन्दावन की गोपियाँ उद्धव से कहती हैं कि हमारे पास तो केवल एक ही मन था, और वह भी हमारे कान्हा के साथ मथुरा चला गया। आँसुओं से भीगी आँखों और विरह से भरे हृदय के साथ वे अपने प्रेम की वेदना व्यक्त करती हैं। उद्धव उन्हें समझाते हुए कहते हैं कि वह परमात्मा परब्रह्म परमेश्वर निराकार, अविनाशी और अजर है। वह सर्वव्यापी है और हर कण में विद्यमान है। इसलिए माया के अन्धकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश में आओ, जहाँ न मिलने का सुख है और न बिछड़ने का दुःख। तभी एक गोपी धीमी आवाज़ में उद्धव से कहती है कि क्या आप हमें प्रेम की इस पीड़ा से मुक्ति दिलाने आए हैं? परन्तु हमने मुक्ति कब माँगी है। हमें तो अपने प्रियतम का स्मरण ही प्रिय है। वास्तव में यह पूरा प्रसंग विरह की एक मार्मिक कथा है। श्रीकृष्ण का गोपियों से दूर जाना, गोपियों का उन्हें स्मरण करके निराश और व्याकुल हो जाना, और फिर श्रीकृष्ण का संदेश लेकर सखा उद्धव का उनके सामने आना, ये सभी प्रसंग श्रीकृष्ण के भक्तों के उद्धार और उनके परम प्रेम की महिमा को प्रकट करते हैं। भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जीवन का उद्देश्य कंस के वध और महाभारत के युद्ध तक सीमित नहीं था, बल्कि अपनी विभिन्न लीलाओं के माध्यम से धर्म, करुणा, प्रेम और न्याय का संदेश प्रदान करना था। अपने भक्तों और मानवता के लिए संकट बनें अधर्मियों का विनाश करके मानव में ईश्वर के प्रति आस्था, श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करना था। उन्होंने सिखाया कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर मानव कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। उनके द्वारा श्रीमद्भागवत के माध्यम से दिए गीता के उपदेश की प्रासंगिकता को अन्य धर्म को मानने वालों ने भी स्वीकार किया। उन्होंने अपने जीवन में अपने भक्तों के साथ शत्रुओं का भी उद्धार किया था। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक उन उद्धार कथाओं संकलित करके आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसका आप भक्ति भाव से आनन्द ले और तिलक से जुड़े रहे। जय श्री कृष्णा #tilak #shreekrishna #kirshna #uddharkatha #katha #ramanandsagar #ramanandsagarkatha #shreekrishnakatha
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9:38Tilak
16 घंटे पहले