ऋष्यमूक पर्वत पर श्रीराम से मिलने आए सुग्रीव उन्हें बताते है कि उसका बड़ा भाई बालि किष्किंधा नगरी का राजा था और वो युवराज। वह सदैव बालि के प्रति निष्ठावान था। एक दिन वह दोनों एक मायावी दानव से युद्ध करने के लिए गए, लेकिन दानव एक गुफा में घुस गया। बालि उसको गुफा के बाहर पहरे पर छोड़कर गुफा के अन्दर चला गया। एक वर्ष बाद गुफा से निकलते रक्त को देख कर उसे लगा कि बालि दानव के हाथों मारा जा चुका है, इसलिए गुफा को एक बड़ी शिला से बन्द कर दिया। किष्किंधा के मन्त्री परिषद ने बालि के न रहने पर मुझे नया राजा घोषित कर दिया। लेकिन वह रक्त वास्तव में मायावी दानव का था, जिसे बालि ने मार दिया था। गुफा से बाहर आकर मुझे राजसिंहासन पर बैठा देख बालि को लगा कि मैंने उसके साथ विश्वासघात किया है और मुझे दण्ड देने के लिए उसने मुझ पर अपनी गदा से कई प्रहार किए। मैं बचने के लिए ऋष्यमूक पर्वत में आकर छिप गया, क्योंकि बालि मंतग ऋषि के श्राप के कारण इस पर्वत पर कभी नहीं आ सकता था। सुग्रीव की बातें सुनकर श्री राम उसे आश्वस्त करते है कि कल सूर्योस्त से पहले उसका राज्य और उसकी पत्नी दोनों प्राप्त हो जाएंगे। अगले दिन सुग्रीव के ललकारने पर बालि अपने महल से बाहर आकर वन क्षेत्र में युद्ध करने लगता है। चूंकि बालि को यह वरदान प्राप्त था कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी आधी शक्ति स्वयं प्राप्त कर लेता है, इसलिए श्री राम पेड़ की ओट से बालि पर तीर चला देते है, जिससे वह मरणासन्न होकर धरती पर गिर पड़ता है। वह श्रीराम को इस प्रकार वार करने के लिए धिक्कारता है और उन्हें अधर्मी कहता है। तब श्रीराम उसे विस्तार से धर्म का ज्ञान देते है, तो उसको आत्मग्लानि होती है और मरते समय अपना राज्य सुग्रीव को सौंप देता है। इस प्रकार भगवान श्रीराम के हाथों मृत्यु पाकर बालि को मोक्ष प्राप्त हो जाता है। वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए। #tilak #ramayan #katha #uddharkatha #ramayanuddharkatha
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9:38Tilak
14 घंटे पहले