श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के षष्ठ अध्याय में सुनिए विराट पुरुष की उत्पत्ति की दिव्य कथा, जिसका वर्णन मैत्रेय ऋषि विदुर जी को सुनाते हैं। भगवान की प्रेरणा और काल शक्ति से महत् तत्व, अहंकार, पंचमहाभूत, पंच तन्मात्राएँ, मन और इन्द्रियाँ एकत्रित होकर विराट पुरुष के प्रकट होने का आधार बनते हैं। इस अध्याय में बताया गया है कि किस प्रकार विराट पुरुष के विभिन्न अंगों से लोकों, इन्द्रियों और उनके अधिष्ठाता देवताओं का संबंध प्रकट होता है। साथ ही, विराट पुरुष के शरीर से चार वर्णों की उत्पत्ति, उनके कर्तव्यों और भगवान की योगमाया की असीम महिमा का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में जानिए: भगवान की प्रेरणा से विराट पुरुष की उत्पत्ति कैसे हुई। 23 तत्त्वों के एकत्रित होने और सृष्टि के विकास का वर्णन। विराट पुरुष के विभिन्न अंगों से लोकों और देवताओं का प्राकट्य। विराट पुरुष के शरीर से चार वर्णों की उत्पत्ति और उनके कर्तव्य। भगवान की योगमाया और उनकी असीम महिमा का दिव्य वर्णन। श्रीहरि के गुणों का गान और भगवत कथा के श्रवण का महत्व। यह अध्याय हमें सृष्टि में भगवान की व्यापक उपस्थिति और उनकी अनंत शक्ति का स्मरण कराता है। श्रीहरि की महिमा का श्रवण और कीर्तन मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है तथा मन में भक्ति और श्रद्धा को जागृत करता है। 🎙️ Credits: Sung, Composed & Narrated by Shailendra Bhartti 🙏 श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य कथाओं के श्रवण के लिए जुड़े रहें Tilak के साथ। वीडियो को Like करें, Share करें और ऐसी ही आध्यात्मिक कथाओं के लिए चैनल को Subscribe करना न भूलें। हरि ॐ तत्सत्। 🙏 #ShreemadBhagavatMahapuran #Skandh3Adhyay6 #ViratPurush #SrishtiRachna #ShailendraBharti #Tilak
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9:38Tilak
15 घंटे पहले