शबरी प्रतिदिन प्रातः वन से सुंदर पुष्प चुनकर अपनी कुटिया तक के मार्ग पर बिछाती है क्योंकि उसे अटूट विश्वास था कि उसके दिवंगत गुरु मतंग ऋषि के द्वारा दिए वचन के अनुसार एक दिन उसके आराध्य प्रभु श्रीराम उसके आश्रम में अवश्य पधारेंगे। उसे यह सब करता देख अन्य साधु-संत उसका उपहास भी उड़ाते है, परन्तु शबरी मार्ग में पुष्प बिछाना नहीं छोड़ती है। अंततः वह शुभ घड़ी आती है जब राम और लक्ष्मण उसकी कुटिया में प्रवेश करते हैं। विनम्र और आनंदित शबरी प्रेमपूर्वक श्री राम को खाने के लिए चख कर चुने हुए मीठे बेर खाने के लिए देती है। श्री राम उसकी निष्कलंक भक्ति से अभिभूत हो उठते हैं और उन बेरों के अति चाव से खाते है। भाई श्री राम को इस प्रकार बेर खाता देख लक्ष्मण असमंजस में पड़ जाते हैं, किंतु राम की आज्ञा के कारण उन बेरों को खाने लगते है। बातचीत के दौरान शबरी उन्हें बताती है कि उसके गुरुदेव महातपस्वी मतंग ऋषि के तपोबल के प्रभाव से यहाँ फूल कभी नहीं मुरझाते है, फल सदा ताजे रहते है। यहाँ तक सभी हिंसक प्राणी अपनी हिंसा छोड़ देते है। मेरे गुरुदेव ने कहा था कि जब एक दिन श्री राम लक्ष्मण के साथ इस आश्रम में आकर मेरे अतिथि बनेंगे, जिनके दर्शन मात्र से मुझे भक्ति का चरम फल प्राप्त हो जाएगा। मुझे अपनी भार्या की खोज में आए श्री राम को सुग्रीव तक पहुँचने का मार्ग बताना होगा। शबरी श्री राम को मतंग ऋषि के दिव्य तपस्थल पर ले जाती है। वहाँ नीच कुल में जन्मी शबरी की विनती पर श्रीराम उसे भक्ति और ज्ञान का उपदेश देते हैं। जिसे शबरी का उद्धार हो जाता है और परमधाम की ओर प्रस्थान कर जाती है। वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए। #tilak #ramayan #katha #uddharkatha #ramayanuddharkatha
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9:38Tilak
18 घंटे पहले