श्रीराम-सीता-लक्ष्मण का वन गमन - यह दृश्य जब हमारी आँखों के सामने आता है, तो हृदय कुछ क्षणों के लिए जैसे थम-सा जाता है। मन भीतर से चीख-चीखकर कह उठता है - हे रघुराई! वन मत जाइए… अयोध्या को यूँ सूना मत कीजिए! लेकिन हम जानते हैं कि प्रभु श्रीराम का वन गमन धर्म की रक्षा के लिए रची गई उनकी दिव्य लीला है। प्रभु के चरण अयोध्या से वन की ओर बढ़ते हैं, तो पीछे छूट जाता है राजमहल, वैभव और सुख-सुविधाओं का संसार, और साथ चलती हैं माता सीता और भ्राता लक्ष्मण की अटूट निष्ठा, जो वन के इस कठिन मार्ग को भी प्रेम और समर्पण से सुगम बना देती है। वन गमन की लीला कर प्रभु श्रीराम अपने आचरण से हमें सिखाते हैं कि परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों, धर्म की राह और दिए हुए वचन से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। सियावर राम चंद्र की जय! राजमहल को तजकर, साधक जैसा सजकर, वन की ओर चले रघुवर, वन की ओर चले रघुवर। भार्या और भाई उनके, साथ खड़े हैं इस क्षण में, चौदह वर्ष बिताएँगे अब, तीनों अनजाने कानन में। दुर्गम होंगी राहें सारी, पथ पर होंगे केवल पत्थर, पार करेंगे फिर भी तीनों, मिलकर दुख का सागर। राम गये तो राजमहल, बन जाएगा पल में खंडर, राजमहल को तजकर, साधक जैसा सजकर, वन की ओर चले रघुवर, वन की ओर चले रघुवर। Keywords - Shri Ram Van Gaman Ram Sita Lakshman Vanvas Shri Ram Vanvas Ram Vanvas Story Ram Sita Lakshman Forest Journey Shri Ram Van Gaman Katha Ayodhya aur Vanvas Ramayan Van Gaman Sita Ram Lakshman Vanvas Lord Ram Forest Exile श्रीराम वन गमन श्रीराम सीता लक्ष्मण वनवास राम वनवास कथा श्रीराम का वन गमन राम सीता लक्ष्मण वन यात्रा श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास अयोध्या से वनवास रामायण वन गमन प्रसंग सीता राम लक्ष्मण वनवास प्रभु श्रीराम की वनवास लीला #KathaSagar #Ramayan #ShriRam
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9:38Tilak
15 घंटे पहले