लंका तक पहुँचने के लिए वानर सेना बड़े-बड़े पत्थरों को समुद्र में डालने लगते है। लेकिन पत्थरों को समुद्र के जल में डूबता देख श्रीराम चिंतित हमें किसी भी प्रकार बिना विलंब के यह सेतु बनना चाहिए क्योंकि हनुमान से मिलने के बाद सीता की आंखें केवल हमारे दर्शन के लिए तरस रही होंगी। लक्ष्मण कहते है कि परंतु सेतु इतनी जल्दी कैसे बन पाएगा? श्रीराम हनुमान जी को देखते हुए कहते है कि हनुमान, तुम विलक्षण हो। तुम विशालकाय रूप धारण कर अंतरिक्ष मार्ग से उड़ते हुए इस विशाल समुद्र को पार करते हुए शत्रु के घर में घुसकर सीता तक पहुंचे। अब तुम ही बताओ कि इस विशालकाय समुद्र पर कैसे सेतु बनाएं? श्रीराम को दुखी होता देख हनुमान जी कहते है कि मैं मार्ग बनाऊंगा प्रभु। यह कह हनुमान जी अपना शरीर विशाल करते हुए समुद्र से ललकारते हुए कहते है कि हे समुद्रराज, मैं रुद्रावतार पवन पुत्र हनुमान आपको आदेश देता हूँ कि हमें लंका जाने के लिए तत्काल मार्ग दें अन्यथा प्रभु श्रीराम की सौगंध, मैं स्वयं महर्षि अगस्त की भांति स्वयं आपका जल ही पी जाऊंगा और श्रीराम के लक्ष्मण और वानर सेना सहित लंका तक नहीं पहुंचने तक उस जल को पेट में रखे रहूँगा। उनकी ललकार को सुनकर समुद्रराज प्रकट होते है और हनुमान जी को श्रीराम की सौगंध देते हुए रुक जाने के लिए कहते है। हनुमान जी कहते है कि आपने प्रभु श्री राम की सौगंध देकर आपने मेरे हाथ ही बांध दिए। मैं तो प्रभु श्री राम की सहायता कर सीता मैया को प्रभु श्री राम से मिलाना चाहता था। परंतु आपने मुझे सौगंध देकर विवश कर दिया। समुद्रराज कहते है कि पवन पुत्र यदि आप मेरा सारा जल पी जाते तो उसका क्या दुष्परिणाम होता, यह सोचा है तुमने? स्वयं श्री राम अपनी मानव मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहते। यदि वह चाहते तो केवल एक ही बाण से मेरा भेदन करके अपने लिए मार्ग बना सकते थे। परंतु उन्होंने ऐसी कोई लीला नहीं दिखाई। वह तो मानव जाति के सामने ऐसा उदाहरण रखना चाहते हैं कि अपने उचित उद्देश्यों को पाने तथा धर्म के पालन के लिए मनुष्य अपनी सीमित शक्ति से भी चमत्कार दिखा सकता है। हनुमान जी कहते है कि मैं क्या करूं समुद्रराज, मैं प्रभु के मुख मंडल पर दुख की रेखाएं नहीं देख सकता। समुद्रराज कहते है कि आप प्रभु की योग माया यानि मेरी पुत्री वैष्णवी की शरण में जाइए। रामायण और जय श्री कृष्णा धारावाहिक को मिले अपार प्रेम के पश्चात रामानंद सागर जी ने धार्मिक धारावाहिकों की अगली श्रृंखला के रूप में जय महालक्ष्मी धारावाहिक का निर्माण करके महर्षि मार्कण्डेय द्वारा जन कल्याण के लिए सुनाई गई माता महालक्ष्मी की दिव्य कथा को जन मानस के सामने प्रस्तुत किया है। भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जिन्हें धन, सम्पदा और समृद्धि की देवी माना जाता है और उनकी अनुकम्पा से ही मनुष्य का जीवन का संचालन सुचारू रूप से चलता है। “तिलक” चैनल “दिव्य कथाएं” के इस संकलन के माध्यम से माता महा लक्ष्मी से जुड़े कुछ अमूल्य प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसके अवलोकन/श्रवण करने से आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। अतः भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये। #tilak #jaimahalaxmi #mahalaxmi #jaimahalxmidivyakatha #divyakatha
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9:38Tilak
14 घंटे पहले