लंका पहुँचने के लिए मार्ग में बाधा के रूप में दिखाई दे रहे समुद्र को देख श्रीराम समुद्र देव से प्रार्थना करते हुए कहते है कि हम आप पर सेतु बनाकर लंका जाना चाहते हैं ताकि सीता को रावण के पंजों से मुक्त करा सके। उनकी प्रार्थना को सुनकर समुद्र देव रत्नाकर प्रकट होकर कहते है कि प्रभु आपको तो अपने सेवक को आदेश देना चाहिए। यदि आप आज्ञा दें तो मैं भयंकर और विकराल लहरों का रूप धारण करके लंका को डुबो सकता हूँ। श्रीराम कहते है कि इससे तो मानवीय मर्यादाओं का उल्लंघन होगा और फिर इससे अनेक निष्पाप प्राणी भी मारे जाएंगे। समुद्र देव कहते है कि आप मुझ पर सेतु बांध लीजिए प्रभु, परंतु मेरी एक प्रार्थना है कि आप लंका जाने से पहले मेरी पुत्री वैष्णव को दर्शन दीजिए। जो आपके दर्शन की अभिलाषा से तपोवन में भगवान विष्णु की तपस्या कर रही है। समुद्र देव की विनती को स्वीकार श्रीराम हनुमान जी के हाथों के ऊपर बैठकर वैष्णव के आश्रम में पहुँचते है। हनुमान जी के साथ प्रभु श्रीराम को देखकर देवी वैष्णव की आँखों से आँसू निकलने लगते है। श्रीराम देवी वैष्णव से कहती है कि क्या मनुष्य अवतार में आप अपने सत्य स्वरूप को भूल गई कि आप साक्षात महालक्ष्मी का अवतार हैं। देवी वैष्णव कहती है कि मैं तो आपके दर्शनों के लिए व्याकुल थी। मैं मनुष्य अवतार में भी मैं आपको पाना चाहती हूँ। आपने केवल रमा रूप को स्वीकार किया है, परंतु लक्ष्मी, दुर्गा, सावित्री, सरस्वती और पार्वती भी तो आप ही की प्रेरणा से बने रूप हैं। आप मुझे लक्ष्मी के रूप में स्वीकार कीजिए, जिससे मेरा मनुष्य योनि में जन्म लेना सार्थक हो जाए। श्रीराम कहते है कि मैंने राम अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श की प्रतिज्ञा करने वालों के लिए लिया है, इसलिए मैं लोक मर्यादा के विपरीत कोई बात मन में भी नहीं ला सकता। यदि आप चाहे तो इस समय लोक उद्धार के लिए भगवान के शत्रु अधर्मी रावण का वध करने के लिए मुझे अपना महान तपोबल प्रदान कीजिए। देवी वैष्णव कहती है कि प्रभु मेरा सब कुछ तो आप ही हैं, इसलिए मेरे द्वारा प्राप्त किया गया तप आपका ही है। यह कह देवी वैष्णव अपना तपोबल श्रीराम को प्रदान कर देती है। देवी वैष्णवी की उदारता से प्रसन्न होकर श्रीराम कहते है कि लंका से जब मैं अधर्मी रावण का नाश करके लौटूंगा तब मैं आपसे मिलने अवश्य आऊंगा। रामायण और जय श्री कृष्णा धारावाहिक को मिले अपार प्रेम के पश्चात रामानंद सागर जी ने धार्मिक धारावाहिकों की अगली श्रृंखला के रूप में जय महालक्ष्मी धारावाहिक का निर्माण करके महर्षि मार्कण्डेय द्वारा जन कल्याण के लिए सुनाई गई माता महालक्ष्मी की दिव्य कथा को जन मानस के सामने प्रस्तुत किया है। भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जिन्हें धन, सम्पदा और समृद्धि की देवी माना जाता है और उनकी अनुकम्पा से ही मनुष्य का जीवन का संचालन सुचारू रूप से चलता है। “तिलक” चैनल “दिव्य कथाएं” के इस संकलन के माध्यम से माता महा लक्ष्मी से जुड़े कुछ अमूल्य प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसके अवलोकन/श्रवण करने से आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। अतः भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये। #tilak #jaimahalaxmi #mahalaxmi #jaimahalxmidivyakatha #divyakatha
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!
9:38Tilak
18 घंटे पहले