श्रीराम-सीता-लक्ष्मण का वन गमन - यह दृश्य जब हमारी आँखों के सामने आता है, तो हृदय कुछ क्षणों के लिए जैसे थम-सा जाता है। मन भीतर से चीख-चीखकर कह उठता है - हे रघुराई! वन मत जाइए… अयोध्या को यूँ सूना मत कीजिए! लेकिन हम जानते हैं कि प्रभु श्रीराम का वन गमन धर्म की रक्षा के लिए रची गई उनकी दिव्य लीला है। प्रभु के चरण अयोध्या से वन की ओर बढ़ते हैं, तो पीछे छूट जाता है राजमहल, वैभव और सुख-सुविधाओं का संसार, और साथ चलती हैं माता सीता और भ्राता लक्ष्मण की अटूट निष्ठा, जो वन के इस कठिन मार्ग को भी प्रेम और समर्पण से सुगम बना देती है। वन गमन की लीला कर प्रभु श्रीराम अपने आचरण से हमें सिखाते हैं कि परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों, धर्म की राह और दिए हुए वचन से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। सियावर राम चंद्र की जय! #KathaSagar #Ramayan #ShriRam
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9:38Tilak
16 घंटे पहले